Sunday, April 29, 2018

WhatsApp matters

**उन्हें कामयाबी में सुकून नजर आया*
*तो वो दौड़ते गए,*
*हमें सुकून में कामयाबी दिखी*
*तो हम ठहर गए...!*

*ख़्वाईशो के बोझ में बशर*
*तू क्या क्या कर रहा है..*
*इतना तो जीना भी नहीं*
*जितना तू मर रहा है...*

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